आज जब हम टीवी या स्मार्टफोन चालू करते हैं, तो छोटा भीम (Chhota Bheem), विक्रम बेताल (Vikram Betal) या माइटी राजू (Mighty Raju) जैसे स्वदेशी कार्टून कैरेक्टर्स आसानी से दिख जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब भारतीय टीवी चैनल्स पर सिर्फ विदेशी कार्टून (जैसे Tom and Jerry, Scooby-Doo, या Pokemon) का ही राज था? भारत में खुद का कोई बड़ा कार्टून कैरेक्टर नहीं था जिसे भारतीय बच्चे अपना कह सकें।
फिर कैसे हैदराबाद के एक छोटे से स्टूडियो ने भारतीय एनिमेशन की किस्मत बदल दी? आइए जानते हैं Chhota Bheem और Vikram Betal के बनने और भारतीय एनिमेशन इंडस्ट्री के क्रांति की पूरी कहानी!
1. राजीव चिलाका और ‘ग्रीन गोल्ड एनिमेशन’ की शुरुआत
इस पूरी क्रांति के पीछे एक शख्स का दिमाग था – राजीव चिलाका (Rajiv Chilaka)। अमेरिका से इंजीनियरिंग और एनिमेशन की पढ़ाई करने के बाद राजीव जब भारत लौटे, तो उन्होंने देखा कि भारत का एनिमेशन बाज़ार पूरी तरह खाली था।
2001 में उन्होंने हैदराबाद में Green Gold Animation नाम की कंपनी की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में पैसों की भारी किल्लत और चैनल्स की अस्वीकृति (Rejections) के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
2. पहला कदम: ‘विक्रम बेताल’ और ‘कृष्णा’ से मिली पहचान
छोटा भीम बनाने से पहले ग्रीन गोल्ड एनिमेशन ने भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं (Indian Mythology & Folklore) पर प्रयोग करना शुरू किया।
- Vikram Betal: राजा विक्रमादित्य और बेताल की कहानियों पर आधारित इस 2D एनिमेटेड शो ने बच्चों को न सिर्फ मनोरंजन दिया, बल्कि हर कहानी के अंत में एक बेहतरीन सीख भी दी।
- Krishna Series: Cartoon Network पर रिलीज़ हुई ‘कृष्णा’ 4-पार्ट एनिमेटेड सीरीज़ ने टीवी पर TRP के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
इन शोज़ ने चैनल्स को यह भरोसा दिलाया कि भारतीय बच्चे अपने देश के रीति-रिवाजों और लोककथाओं से जुड़े कार्टून देखना पसंद करते हैं।
3. ‘छोटा भीम’ का जन्म: वह विचार जिसने इतिहास रच दिया (2008)
‘विक्रम बेताल’ और ‘कृष्णा’ की सफलता के बाद राजीव चिलाका एक ऐसा कैरेक्टर बनाना चाहते थे जो पौराणिक नहीं, बल्कि एक आम भारतीय बच्चे जैसा हो—जिससे बच्चे खुद को कनेक्ट कर सकें।
- आइडिया: महाभारत के ‘भीम’ की विशाल ताकत से प्रेरित होकर 9 साल के नटखट बच्चे ‘छोटा भीम’ की कल्पना की गई।
- ढोलकपुर की दुनिया: भीम को भगवान नहीं, बल्कि ढोलकपुर गांव का एक साधारण बच्चा दिखाया गया जिसे लड्डू खाने से सुपर-पावर मिलती है। साथ में चुटकी, राजू, जग्गू बंदर और कालिया-धोलू-भोलू जैसे रिलेटेबल कैरेक्टर्स जोड़े गए।
- POGO टीवी की एंट्री: जब कई चैनल्स ने इस कांसेप्ट को रिजेक्ट कर दिया, तब POGO TV ने 2008 में इसे ऑन-एयर किया। इसके बाद जो हुआ, वह भारतीय टीवी इतिहास का एक नया अध्याय बन गया!
4. ‘छोटा भीम’ का ग्लोबल ब्रांड बनना ($100+ Million IP)
छोटा भीम सिर्फ टीवी तक सीमित नहीं रहा:
- मर्चेंडाइजिंग (Merchandising): स्कूल बैग्स, स्टेशनरी, खिलौने से लेकर लड्डुओं के पैकेट पर भीम की तस्वीर छपने लगी।
- थिएटर फिल्में: 2012 में ‘Chhota Bheem and the Curse of Damyaan’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।
- Mighty Little Bheem (Netflix): 2019 में बिना डायलॉग वाला ‘माइटी लिटिल भीम’ नेटफ्लिक्स पर आया और अमेरिका, यूरोप समेत पूरे विश्व में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले बच्चों के शोज़ में शामिल हो गया।

राजीव चिलाका (Rajiv Chilaka)
5. भारतीय एनिमेशन इंडस्ट्री पर इसका असर
Chhota Bheem और Vikram Betal की सफलता ने भारतीय एनिमेशन उद्योग के दरवाजे खोल दिए। इसके बाद भारतीय टीवी पर नए स्वदेशी शोज़ की झड़ी लग गई:
- Motu Patlu (Furfuri Nagar)
- Roll No. 21 (Kris & Kamsa)
- Little Singham & Golmaal Jr.
आज भारत सिर्फ विदेशी कंपनियों के लिए एनिमेशन आउटसोर्सिंग नहीं करता, बल्कि खुद के वर्ल्ड-क्लास ब्रांड्स (IPs) बनाकर दुनिया भर में एक्सपोर्ट कर रहा है!
निष्कर्ष (Conclusion)
विक्रम बेताल के किस्सों से शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँच चुका है। ‘छोटा भीम’ केवल एक कार्टून नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि अगर हमारी अपनी कहानियों को सही तरीके से पेश किया जाए, तो वे दुनिया के किसी भी कोने में दिल जीत सकती हैं।
आपका पसंदीदा इंडियन कार्टून कैरेक्टर कौन सा है? हमें नीचे कमेंट में जरूर बताएं!

Leave a Reply